Thursday, June 21, 2018

सुंदर मुस्कान और स्वस्थ दांतों के लिए


हर चेहरे पर फबती है एक सुंदर सी मुस्कान. और मुस्कान को सुंदर बनाते हैं आपके स्वस्थ दांत. अगर दांत पीले होंगे, उनमें कीड़े लगे होंगे या फिर खून जमा होगा तो आपकी मुस्कान को नजर लग सकती है अस्वस्थ दांतों की. इतना ही नहीं, पेट से जुड़ी कई समस्याएं भी दांतों में पैदा हुई कई बीमारियों की वजह से जन्म ले सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि आप मानसून के दौरान दांतों से संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं, जो दांतों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए टूथब्रश बदलना जरूरी है और नियमित रूप से दांतों को फ्लॉस (दांत साफ करने वाला धागा) करें. कुछ सावधानियों को बरत कर आप अपने दांतों को स्वस्थ रख सकते हैं.

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* अपने टूथब्रश को अक्सर बदलते रहें और नया टूथब्रश इस्तेमाल करें क्योंकि इससे मुंह की स्वच्छता को बरकरार रखने में मदद मिलती है. 
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* नियमित रूप से फ्लॉस करना चाहिए. सुझाए गए फ्लॉस की लंबाई हर फ्लॉसिंग सेशन में 18 इंच है. दिन-प्रतिदिन के फ्लॉसिंग प्लान के हिसाब से एक महीने में यह करीब 45 फीट का हो जाएगा. 


* विटामिन सी और कैल्शियम युक्त उचित स्वास्थ्यपरक आहार के साथ मौसमी खाद्य पदार्थों और सब्जियों का सेवन जरूरी है. मानसून में सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, दही और ओट का सेवन लाभकारी होता है. 
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* नियमित रूप से दांतों का चेकअप सभी के लिए जरूरी है. इससे न सिर्फ आपके दांत स्वस्थ रहेंगे बल्कि कोई समस्या होने पर शुरुआती अवस्था में ही इसका पता चल जाएगा. 

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इस मौसम में हम कॉफी या चाय जैसे गर्म पेय क खूब सेवन करते हैं, जिसमें कैफीन होता है, इससे आपके दांत खराब या कमजोर हो सकते हैं और उन पर दाग या कालापन हो सकता है, इसलिए दोनों का कम मात्रा में सेवन करने की कोशिश करें. 

Wednesday, June 20, 2018

Best Health Tips for Women

Welcome in Health Tips For Women 1. अपने तनाव को नष्ट करे –
“यह सबसे बड़ी समस्या है जो ज्यादातर महिलाओं में दिखाई देती और यह इस वजह से होती है उनके पास करने के लिए बहोत से काम होते है और वे उन सभी को एक साथ करना चाहती है. तनाव से आपको और भी स्वास्थ संबंधी बीमारिया हो सकती है. इससे आपको शुगर, ह्रदय रोग जैसी भयंकर बीमारिया भी हो सकती है. इसीलिये अपने आप को ज्यादा तनाव में न रखे और तनाव से दूर रहने की कोशिश करे.”
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2. अपने खान पान पर ध्यान दे –
ज्यादातर महिलाएं काम काज के चक्कर में अपने खाने पिने पर ध्यान नहीं देती, अगर आपको पुरे घर का ध्यान रखना हो तो पहले खुद का ध्यान रखना होंगा इसलिए महिलाओं ने अपने स्वास्थ का पूरा ध्यान रखना होंगा.

3. ज्यादा नींद ले –

नींद महिलाओ के लिये बहोत जरुरी है. यदि आपकी इच्छा पलंग से उठने की नहीं होती या आपको थकावट महसूस होती है तो आपको पर्याप्त नींद लेनी चाहिये. क्योकि पर्याप्त नींद लेने से आप ह्रदय संबंधी बीमारियों से और मानसिक बीमारियों से बाख सकते हो.
इसे पढ़े: अब पतले और रूखे बालो को कहिये अलविदा 4. ज्यादा मात्रा में कैल्शियम ग्रहण न करे.
“बहोत ज्यादा मात्रा में कैल्शियम की मात्रा ग्रहण करने से आपको किडनी स्टोन संबंधी बीमारिया और साथ ही ह्रदय विकार भी हो सकता है. यदि आपकी उम्र 40 से कम है, तो आपको हर दिन 1000 मिलीग्रम, और यदि 40 से उपर है तो 12 मिलीग्राम कैल्शियम की जरुरत आपको होगी. और ये आपको पोष्टिक पदार्थ दुध और बादाम से मिल सकते है.”
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5. व्यायाम करते रहे –
“महिलाओ को ज्यादा से ज्यादा व्यायाम करने की जरुरत हो सकती है, यदि महिलाये हफ्ते में कम से कम 2 से 3 बार भी व्यायाम करे तो वे ह्रदय विकार, शुगर, कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से बच सकती है. व्यायाम करते रहने से आपका व्यक्तित्व भी निखरेगा और साथ ही आपका स्वास्थ भी अच्छा रहेगा.”

6. जनन क्षमता का विचार करे –

“बहोत सी महिलाओ को 30 से 40 की उम्र में भी गर्भवती होने की कोई समस्या नही होती है, लेकिन 32 की उम्र से ही वे अपनी जनन क्षमता को खोना शुरू कर देती है. इसीलिये यदि आपको बच्चा चाहिये, तो अपने डॉक्टर से सलाह ले.”

7. स्वस्थ संभोग करे –

संभोग आपके तनाव को कम करता है और ऐसा करने से दीर्घकालीन बीमारियों का खतरा कम होता है. लेकिन यह तभी संभव है जब आप ख़ुशी से संभोग करो. यदि संभोग करते समय आपकी किसी प्रकार की कोई तकलीफ होती है तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाये.”

8.
आनुवांशिक जांच को ध्यान रखे –

आजकल लोगो में कुछ बीमारिया आनुवांशिक भी होने लगी है जैसे शुगर, ह्रदय संबंधी बीमारी, कैंसर इत्यादि. इसीलिये अपने आनुवांशिक इतिहास को जानकार यदि कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से उस बारे में बात करनी चाहिये.

इन उपायों को अपनाने से आप स्वस्थ रह सकते हो. महिलाओ का स्वस्थ रहना बहोत जरुरी होता है, उन्ही एक महिला पर ही पूरा घर निर्भर होता है. ऊपर दिए गए उपयो को अपनाकर महिलाये आसानी से स्वस्थ रह सकती है. और महिलाये यदि स्वस्थ रहेगी तभी वे परिवार का पालन पोषण स्वस्थ रूप से कर पाएंगी.

आखिर किसी ने सही कहा है, “स्वास्थ ही इंसान की सबसे बड़ी संपत्ति है”.
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Tuesday, June 19, 2018

Pregnancy में क्या खाएं क्या नहीं।


Pregnancy में क्या खाएं क्या नहीं। : Pregnancy में आहार को लेकर एक पहलु ऐसी चीजों का है जो ऐसे नाजुक वक्त में नुकसान पहुंचा सकती है।  इसके अलावा Pregnancy में डॉक्टर द्वारा Pregnant women को बहुत सीमित दवाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है। क्योंकि कुछ दवाओं का बढ़ते हुए भ्रूण पर बुरा असर पड़ सकता है। Antibiotic and pen relief दवाओं का सेवन भी निर्धारित होता है। कुल मिलाकर ऐसी परिस्थिति में यह जरूरी है कि Pregnant women को किसी भी प्रकार का infection ना होने पाए। 

Pregnancy में क्या खाएं क्या नहीं। इसके लिए निम्नलिखित Food items का सेवन ना करें।
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1. सलाद व कटे फल – 
कई होटलों में सलाद और फल खाने के मेन्यू का हिस्सा होते हैं और आप अलग से भी सलाद और फलों का Order दे सकती हैं। लेकिन यह फल और सलाद कई घंटे पहले काटे जाते हैं। और इनमें कई प्रकार के कीटाणु होते हैं जो। आपको infection का शिकार बना सकते हैं।

2. फलो या गन्ने का रस – 
फलों का रस बनाते वक्त साफ़ पानी का इस्तेमाल नहीं होता और ना ही साफ बर्तन में बनाए जाते हैं। अगर आप फलों के रस का सेवन करना चाहती हैं। तो उन्हें अच्छी तरह से साफ करें और रस घर में ही बनाएं। 

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फलों के रस के मुकाबले साबूत फलों का सेवन करना ज्यादा अच्छा रहता है। क्योंकि इनमे आपको ज्यादा Nutrition and fiber देते हैं और आपके Blood sugar को बढ़ने नहीं देते।

3. अंडे – 
अंडों में साल मोनेला स्पीकेएसएस बक्टेरिया जीवाणु होते हैं जो की कई infection का कारण बन सकते हैं। इसीलिए Pregnancy में अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनको पचाना आसान नहीं होता अगर आप इनका सेवन करते हैं। उसे तुरंत बंद कर दे। 

4. मांस और मछली का सेवन – 
डब्बा बंद हो या कैसा भी इनका सेवन भूलकर भी ना करें। क्योंकि इनमे Mercury के बढे हुए स्तर पाए जाते हैं जो बच्चे के मानसिक विकास पर असर डालते हैं।


5. मिठाई का इस्तेमाल न करें – 
मिठाई आपको किसी प्रकार का पोषण नहीं देती। ज्यादा मीठी चीजों का सेवन करने से आपका वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है जो कि बच्चे के जन्म के वक्त परेशानी पैदा कर सकता है। साथ ही यह Insulin sensitivity का कारण बन सकता है और भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है 
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6. कैफीन – 
चाय और कॉफ़ी का अधिक सेवन बच्चे के विकास में तकलीफ पैदा कर सकता है और मानसिक एवं शारीरिक कमी का 
कारण बन सकता है इसलिए दिन में दो कप चाय या कॉफ़ी तक ही सिमित रहे। 

Wednesday, June 13, 2018

मैडिटेशन के चमत्कार



आज योग और ध्यान (Meditation) बहुत ही सामान्य शब्द हो गए हैं । हम सभी इससे भली भांति परिचित हैं और हममें से काफी लोग योग करते भी है । टी.वी. और इंटरनेट ने इसमें काफी सहायता की है । पर अक्सर यही देखने मे आता है कि हम इसकी शुरुआत तो जोर-शोर से करते हैं पर धीरे-धीरे इस उत्साह में कमी होती जाती है ओर हम इसे त्याग How to meditate in Hindiकर सुबह की सैर, दौड़, जिम जाना आदि शुरु कर देते है, जिसमें थोड़ा नयापन और आधुनिकता से जुड़ाव महसूस होता है । आमतौर पर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम ध्यान करते समय बोरियत का अनुभव करने लगते हैं, बोरियत इसलिए क्योंकि 
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कुछ नया नहीं, कुछ रोचक नहीं, कुछ मसालेदार नही । पर यकीन मानिए इससे रोचक, मजेदार और अभूतपूर्व उल्लास आपको कहीं नहीं मिल सकता, बशर्ते आपको पता हो कि करना क्या है, और कैसे है । ध्यान लगाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपका शरीर बेजान या मृत हो गया है जैसे नींद में होता है। यह ध्यातव्य है – “निद्रा अचेतन ध्यान है और ध्यान सचेतन निद्रा (Sleep is unconscious meditation and meditation is conscious sleep)।”
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब खुशियों के पीछे भाग रहे हैं । एक विद्यार्थी अच्छें नंबरों से पास होने के लिए चिंतित रहता है, वह पास हो जाता है, पर खुशी नही होती, चिंता होती है, सोचता है जब नौकरी लग जाएगी तो खुशियां मिलेगी, नौकरी भी मिल जाती है, फिर भी वह आगे सोचता है ,प्रमोशन होने पर खुशिया मिलेगी पर उसे और आगे की चिंता 
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होती है । वह हमेशा भविष्य की खुशियॉं पाने में लगा रहता है और वर्तमान की खुशियों को व्यर्थ जाने देता है, वह कभी यह नहीं समझ पाता कि खुशियॉं कहीं बाहर नहीं , किसी भविष्यव में नहीं बल्कि अभी है, यहीं है, उसके अंदर है, उसके अंतर्मन की शांति मे है, और इस खुशी को लगातार महसूस कराने वाला माध्यम ही ध्यान है । योग का अर्थ है – आत्माा को परमात्मा से जोड़ना । ध्यान में जाकर ही इस कार्य को किया जा सकता है ।

संत कबीरदास ने कहा है – “ तेरा साई तुज्झ मे, ज्यों पुहुपन मे वास ।“

ज्ञानमार्गी शाखा के इतने बड़े संत यह बात यूं ही नहीं कह गए हैं। सच है हमारे शरीर के अंदर विराजमान आत्मा, उस परमात्मा का ही एक अंश है, तो जब परमात्मा सर्वज्ञ हैं, सर्वव्यापी हैं, सर्वशक्तिशाली हैं, तो हम क्यों नहीं। जिस प्रकार हीरे का एक टुकड़ा भी परमाणु सरंचना में बड़े हीरे के समान ही होगा, ठीक वैसे ही उस परमात्मा की शक्तियाँ भी हमारे अंदर है, जरूरत है उसे जानने की, जिसने जाना वो ही उसका उपयोग कर सकता है, अन्यथा एक अज्ञानी की तरह वह हीरे को बस एक चमकदार पत्थर समझकर फेंक देगा। इन शक्तियों को ध्यान मे जाकर ही जाना जा सकता है।

ध्यान में जाने के लिए हमें बाहरी दुनिया के शोरगुल से हटकर अपने अन्तर्मन की आवाज को सुनना होगा। अब अन्तर्मन की आवाज कैसे सुनी जाय, बहुत आसान है, अगर हम बाहर की आवाजों को सुनना बंद कर दे तो जो आवाज रह जाएगी वही अन्तर्मन की आवाज है और इसे सुनना ही ध्यान या समाधी है। किन्तु बाहर की आवाज के साथ-साथ कुछ आवाजें या कहिए शोरगुल हमारे अंदर भी चल रही होती है। आपने आँख 
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और कान तो बंद कर लिया पर दिमाग का सोचना अब भी जारी है- “कल ऑफिस जल्दी जाना है, घर का राशन खत्म हो गया, पत्नी को आज बाहर खाने पर ले जाना है “ आदि आदि बातें जो हमारा ध्यान अपनी ओर भटकाती है किन्तु इसे दूर करना भी कठिन नहीं। जब आप अपने कान बंद करते है, तो आपको दो आवाजें सुनाई देगी, एक आपके धड़कन की और दूसरी साँसो की । इन दो के अलावा एक तीसरी आवाज भी है और हमे अपना ध्यान उसी आवाज की ओर केन्द्रित करना है । यह आवाज बिलकुल झिंगुर की तरह होती है, यकीन नहीं आता, तो आप करके देखियेगा । धीरे धीरे आपको अन्य आवाज़े भी सुनाई देगी जो आरंभ मे तो तेज न होने के कारण सुनाई नहीं देगी पर जैसे- जैसे आप ध्यान करते जाएंगे ये आवाज़े स्पष्ट होती जाएंगी, कभी आप धीमी गति से बह रहे नदी के जल प्रवाह की आवाज सुनेंगे तो कभी रिमझिम गिरती बारिश के बूंदों की । वे सारी आवाजें जो आप बाहर की दुनिया मे सुनते है, आप को अपने अंदर भी सुनाई देंगी और धीरे धीरे कब आप आत्म- अनुभूति (Self Realization) की ओर कदम बढ़ा चुके होंगे आपको पता भी नहीं चलेगा।



ध्यान लगाने के लिए निम्न प्रक्रिया का पालन करें :-

1. एक आरामदायक व शांत जगह का चुनाव करें , जो कोलाहल से दूर हो और जहाँ आप आराम से बैठ सकें । आप पालथी मारकर भी बैठ सकते या फिर कुर्सी पर बैठे बैठे भी ध्यान लगा सकते है।

2. आँखें बंद हो और कानो मे ईयर प्लग लगाए किसी भी दवा दुकान मे 15 रुपये की कीमत मे नारंगी रंग का ईयर प्लग खरीद लें,न मिलने पर रुई का उपयोग भी कर सकते हैं।

3. दस लंबी साँसे ले धीरे धीरे, आराम से और गहरी साँस ले और उसी तरह आराम से साँस छोंड़े । साँस छोड़ते समय दस से एक की उल्टी गिनती गिनें, याद रहे गिनती सिर्फ साँसे छोड़ते समय गिने, लेते समय नहीं।

4. अपने अंदर की आवाज पर ध्यान केन्द्रित करें मस्तिष्क में चल रही आवाजों को सिर्फ सुनें, उनका विश्लेषण कदापि न करे, सुननें की चाहत भी न करें, वो खुद सुनाई देंगी, मन शांत रखें।

5. अपनी सोच को भटकने न दें अगर कभी सोच भटकती है, तो परेशान न हो, खीझे नहीं, प्यार से मुस्कुराकर उन्हे वापस अपनी ओर ले आइये। वैसे भी एक बार आपको मस्तिष्क में चल रही आवाज़े सुनाई देने लगी तो खुद –ब-खुद अपना का ध्यान वापस वहीं आ जाएगा और आपका दिमाग बाहरी बातों को सोचना बंद कर देगा।

ये तो रहा ध्यान का तरीका, पर इसका उचित प्रतिफल जल्दी पाने के लिए आपको अपने शरीर को निर्मल और स्वच्छ करना होगा । दो तरह से यह किया जा सकता है, पहला अपने शरीर को बाहर से निर्मल करना होगा( detoxification), इसके लिए आप Oil Pulling, जिसका गूगल पर विस्तार से उल्लेख है, कर सकते हैं, सुबह उठकर हल्के गरम जल मे 
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नींबू-नमक डालकर पिये, नियमित रूप से व्यायाम करिए, शारीरिक खेलो में हिस्सा लीजिये, जितना हो सके अपने आप को सक्रिय रखिए। ये तो हुआ बाहर से स्वच्छ रखना, शरीर की अंदरूनी सफाई यानि विचारों को स्वच्छ रखने के लिए, अच्छी पुस्तकें पढें, मंदिर , मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा जहां भी आपके मन को शांति मिलती हो, वहाँ जाएँ, अच्छी विचारधारा वाले लोगों के साथ मिलें अच्छी भाषा का व्यवहार करें, अच्छा सोचें। इससे आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने मे काफी सहायता मिलेगी।